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Adulterated Spices : बाजार के मसालों में मिले खतरनाक Chemicals ; लीवर, आंत, दिमाग सबको करते हैं डैमेज

Adulterated Spices : पिछले दिनों हमने ख़बर दी थी कि राजस्थान में सरकार ने मिलावटी मसालों के डीलर्स के खिलाफ एक मुहिम चलाई हुई है। इस दौरान एमडीएच, एवरेस्ट आदि नामी कंपनियों के मसालों सैंपल जांच के लिए राज्य की सेंट्रल लैब में  भेजे गये थे। अब जब जांच रिपोर्ट आई है तो वाकई उन मसालों में तय मात्रा से अधिक खतरनाक कैमिकल्स पाये जाने की पुष्टि हुई है।‌‌ जांच रिपोर्ट के अनुसार एमडीएच के गरम मसाले में एसिटामिप्रिड, थियामेथोक्साम और  इमिडाक्लोप्रिड ; सब्जी व चना मसाले में ट्राईसाइलाजोन और प्रोफिनोफोस पाये गये हैं। वहीं एवरेस्ट के जीरा मसाला में एजोक्सीस्ट्रोबिन, थियामेथोक्साम पेस्टीसाइड/ इंसेक्टिसाइड निर्धारित मात्रा से काफी अधिक पाए गए। साथ ही सीबा ताजा कंपनी के रायता मसाला में थियामेथोक्साम और एसिटामिप्रिड तयशुदा मात्रा से पाए गए। मसालों में मिले ये कैमिकल हमारे शरीर के लिए सबसे घातक हैं।

इनमें सबसे खतरनाक है एथिलीन ऑक्साइड। मसाले में इसकी मात्रा ज्यादा होने पर लिंफोमा कैंसर और ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर हो सकता है। यह कैमिकल महिलाओं में गर्भपात और पुरुषों में नामर्दी की समस्याएं पैदा कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इन कैमिकलों की ज्यादा  मात्रा शरीर में जाने से फेफड़े, लीवर और आंत डैमेज हो सकते हैं। ये फेफड़ों में जलन, कफ, सांस लेने में दिक्कत जैसी तकलीफों की वजह बन सकते हैं।

लीवर शरीर के अंदर जमा जहरीले तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है। तय मात्रा से अधिक पेस्टिसाइड वाले मसाले बार-बार खाने से लीवर की कार्यप्रणाली धीमी होने लगती है। इससे पीलिया हेपेटाइटिस जैसी समस्याएं पैदा  होती हैं। मसालों में मौजूद नुकसानदायक रसायन हमारी आंत के अंदर मौजूद लाभदायक बैक्टीरिया लैक्टोबेसिलस को भी मार देते हैं जो हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी हैं।

ये कैमिकल बच्चों में अटेंशन डेफिसिट हाइपर- एक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) और ऑटिज्म जैसी मानसिक समस्याएं उत्पन्न होने का ख़तरा रहता है। एडीएचडी में बच्चे की दिमागी गतिविधि और विकास पर बुरा असर देखने को मिलता है। उनमें दिमागी कन्ट्रोल में कमी और हाइपर एक्टिविटी के लक्षण नजर आते हैं। जहां तक ऑटिज्म की बात है, इस समस्या से पीड़ित बच्चा बोलने से लेकर हाव-भाव और स्पर्श के द्वारा अपने विचार और भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाता। आमिर खान की फेमस फिल्म ‘तारे ज़मीन पर’ इसी समस्या पर बनी थी‌।

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