PM Modi Ukraine Trip: रूस के साथ लगातार भीषण युद्ध लड़ रहे यूक्रेन की अपनी पहली यात्रा पर पीएम नरेन्द्र मोदी यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंच गए हैं। इसके लिए पीएम को करीब 10 घंटे तक ट्रेन की यात्रा करनी पड़ी। कीव में भारतीय समुदाय ने मोदी का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान मोदी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ, रूस-यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर बातचीत करेंगे। मोदी जेलेंस्की के साथ एकांत में और फिर प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे, जिसमें रूस-यूक्रेन संघर्ष का बातचीत के जरिए समाधान निकालने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन ने हाल ही में रूसी क्षेत्र में आक्रामक सैन्य अभियान चला रखा है।
भारतीय प्रधानमंत्री की इस यात्रा पर अमेरिका से लेकर रूस तक की नजर है, लेकिन पर्दे के पीछे से चीन भी कड़ी निगाह रख रहा है। मोदी की इस यात्रा पर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने चीनी विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि पीएम मोदी रूस और यूक्रेन के बीच ‘योगा-कूटनीति’ को इस्तेमाल करने की उम्मीद कर रहे हैं। जबकि भारत के पास ‘योगा-कूटनीति’ को सफलतापूर्वक लागू करने की क्षमता की कमी है।
यूक्रेन की राजधानी कीव में राष्ट्रपति जेलेंस्की से मिले प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी
जेलेंस्की के कंधे पर मोदी जी ने हाथ रखा
ये मोदी जी का हाथ नही भारत का साथ है @narendramodi @ZelenskyyUa #ModiInUkrain pic.twitter.com/flZZgeRjlQ
— मयंक उपाध्याय ( मोदी का परिवार ) 🇮🇳🚩 (@MayankUpqdhyay) August 23, 2024
चीनी विशेषज्ञों ने दावा किया कि भारतीय प्रधानमंत्री का यह कदम केवल अपने अस्तित्व को दिखाने की कोशिश है। भारत के पास न तो ताकत है और न ही प्रभाव है जिससे वह मास्को और कीव के बीच बढ़ते संघर्ष और मतभेद को कम कर सके। इसकी वजह यह है कि भारत का यूरोप में प्रभाव बहुत सीमित है। साथ ही रूस के कुर्स्क इलाके में यूक्रेन के आक्रामक अभियान चलाने के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावना और भी कम हो गई है।’ इससे पहले रूस के पूर्व राष्ट्रपति और पुतिन के करीबी दिमित्री मेदवेदेव ने कहा था कि कुर्स्क में हमले के बाद अब यूक्रेन के साथ कोई बातचीत तब तक नहीं होगी, जब तक कि युद्ध के मैदान में जेलेंस्की सेना को पूरी तरह से हरा नहीं दिया जाता।
चीनी प्रोफेसर लांग ने कहा कि क्या भारत के पास इतनी ताकत है कि वह दोनों ही पक्षों को वार्ता की मेज पर ला सके और ऐसा सीजफायर प्रस्ताव दे सके जो दोनों पक्षों को मान्य हो? बता दें कि यूक्रेन पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत का मानना है कि किसी भी संकट का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं निकाला जा सकता। भारत इस क्षेत्र में शांति-स्थिरता बहाल करने के लिए हरसंभव मदद देने को तैयार है।
