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हम 2047 तक विकसित भारत का संकल्प पूरा कर लेंगे… —78 वें स्वतंत्रता दिवस पर नरेंद्र मोदी के सुविचार

Modi On Independence Day: हप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग 6,000 विशेष अतिथियों की मौजूदगी में 11वीं बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा लहराया। इन विशेष अतिथियों में देश के युवा, छात्र, आदिवासी, किसान, महिलाएं, बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के श्रमिक, ओलंपिक के भारतीय खिलाड़ी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आदि उपस्थित थे। देश के 78 वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम ने अपने भाषण में देश में धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता की पुरजोर वकालत की। इस दौरान उन्होंने बहुरंगी राजस्थानी लहरिया प्रिंट वाली पगड़ी पहनी थी, साथ ही सफेद कुर्ता, नीले रंग की बंदगला जैकेट और चूड़ीदार पहना था।

मोदी के 97 मिनट के भाषण ने उनके 2016 के 96 मिनट के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। प्रधानमंत्री ने इस वर्ष के समारोह की थीम — विकसित भारत 2047 पर प्रकाश डालते हुए कहा, “विकसित भारत 2047 के लिए हमने देशवासियों से सुझाव मांगे थे। हमें जो सुझाव मिले, उनमें हमारे नागरिकों के सपने और आकांक्षाएं झलकती हैं। हमारे पूर्वज सिर्फ 40 करोड़ थे। अगर 40 करोड़ गुलामी की बेड़ियां तोड़ सकते हैं, तो 140 करोड़ नागरिक अगर संकल्प लेकर चल पड़ें, तो चुनौतियां कितनी बड़ी क्यों न हों, हर चुनौती को पार करते हुए हम समृद्ध भारत बना सकते हैं। हम 2047 तक विकसित भारत का संकल्प पूरा कर लेंगे!”

बांग्लादेश में हिंसा के बारे में बोलते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पड़ोसी देश में स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी। भारतीय चाहते हैं कि वहां हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”उन्होंने कोलकाता के एक अस्पताल में प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना के मद्देनजर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा, “देश, समाज और राज्य सरकारों को इसे गंभीरता से लेना होगा। महिलाओं के खिलाफ अपराधों की त्वरित जांच होनी चाहिए, इन जघन्य कृत्यों को अंजाम देने वालों को जल्द से जल्द सख्त सजा मिलनी चाहिए – समाज में विश्वास पैदा करने के लिए यह जरूरी है।”

देश के लिए इसे स्वर्णिम युग बताते हुए प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास, आर्थिक सुधारों और देश के युवाओं के लिए उम्मीदों की कई योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने से लेकर धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता और कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश तक, प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न मुद्दों पर बात की। प्रधानमंत्री ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की जोरदार वकालत की और राजनीतिक दलों से इस सपने को साकार करने के लिए आगे आने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से देश की प्रगति में बाधा उत्पन्न हो रही है।उन्होंने कहा कि “सरकार देश में ऐसी शिक्षा प्रणाली बनाना चाहती है जिससे युवाओं को पढ़ाई के लिए विदेश जाने की जरूरत न पड़े। हम चाहते हैं कि विदेशी छात्र यहां आएं और पढ़ाई करें।”

नरेन्द्र मोदी ने कहा, “समान नागरिक संहिता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार चर्चा की है, कई बार आदेश दिए हैं। देश का एक बड़ा वर्ग मानता है – और यह सच है, कि जिस नागरिक संहिता के साथ हम रह रहे हैं, वह वास्तव में एक तरह से सांप्रदायिक नागरिक संहिता है…मैं कहूंगा कि समय की मांग है कि देश में धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता हो…तभी हम धर्म के आधार पर भेदभाव से मुक्त हो सकेंगे…”
उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा, “हम संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं लेकिन कुछ लोग हैं जो ये प्रगति नहीं देख सकते हैं या भारत के अच्छे भविष्य के बारे में तब तक नहीं सोच सकते हैं जब तक कि इससे उन्हें लाभ न हो… देश को इन मुट्ठी भर निराशावादी लोगों से खुद को बचाने की जरूरत है।”

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