UPSC Lateral Entry: केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न मंत्रालयों में संयुक्त सचिवों, निदेशकों और उप सचिवों के प्रमुख पदों पर ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से विभिन्न पदों पर 45 विशेषज्ञ नियुक्त के विवाद के बीच केंद्र ने 20 अगस्त को यूपीएससी से नौकरशाही में लेटरल एंट्री के लिए ताजा विज्ञापन वापस लेने के लिए कहा है। ABP के मुताबिक केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की अध्यक्ष प्रीति सूदन को चिट्ठी लिखकर विज्ञापन रद्द करने को कहा ताकि हाशिए पर पड़े समुदायों को सरकारी सेवाओं में उनका उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
वागी लेटरल एंट्री के लिए ताजा विज्ञापन वापस लेने के मामले पर राहुल गांधी के बाद अखिलेश यादव की भी प्रतिक्रिया सामने आयी है। अखिलेश यादव ने अपने X अकाउंट पर पोस्ट जारी कर कहा, भाजपा के षड्यंत्र अब कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। साथ ही 18 अगस्त को जाहिर गए आंदोलन को अखिलेश यादव ने स्थगित कर दिया है।
जारी किये पोस्ट में अखिलेश यादव ने लिखा, “यूपीएससी में लेटरल एन्ट्री के पिछले दरवाज़े से आरक्षण को नकारते हुए नियुक्तियों की साज़िश आख़िरकार पीडीए की एकता के आगे झुक गयी है। सरकार को अब अपना ये फ़ैसला भी वापस लेना पड़ा है। भाजपा के षड्यंत्र अब कामयाब नहीं हो पा रहे हैं, ये PDA में आए जागरण और चेतना की बहुत बड़ी जीत है”।
यूपीएससी में लेटरल एन्ट्री के पिछले दरवाज़े से आरक्षण को नकारते हुए नियुक्तियों की साज़िश आख़िरकार पीडीए की एकता के आगे झुक गयी है। सरकार को अब अपना ये फ़ैसला भी वापस लेना पड़ा है।
भाजपा के षड्यंत्र अब कामयाब नहीं हो पा रहे हैं, ये PDA में आए जागरण और चेतना की बहुत बड़ी जीत है।…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 20, 2024
“इन परिस्थितियों में समाजवादी पार्टी ‘लेटरल भर्ती’ के ख़िलाफ़ 2 अक्टूबर से शुरू होनेवाले आंदोलन के आह्वान को स्थगित करती है, साथ ही ये संकल्प लेती है कि भविष्य में भी ऐसी किसी चाल को कामयाब नहीं होने देगी व पुरज़ोर तरीके से इसका निर्णायक विरोध करेगी। जिस तरह से जनता ने हमारे 2 अक्टूबर के आंदोलन के लिए जुड़ना शुरू कर दिया था, ये उस एकजुटता की भी जीत है। लेटरल एंट्री ने भाजपा का आरक्षण विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है।”
