Violence Against Women: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कोलकाता में घटित एक लेडी डॉक्टर के साथ हुए जघन्य बलात्कार और हत्या के बाद महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। राष्ट्रपति मुर्मू ने 27 अगस्त को ‘विमेंस सेफ्टीः इनफ इज इनफ’ नाम के एक आर्टिकल को लेकर पीटीआई के एडिटर्स से चर्चा में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कोई भी सभ्य समाज अपनी बेटियों और बहनों पर इस तरह की अत्याचारों की इजाजत नहीं दे सकता।राष्ट्रपति ने कहा, “बस, बहुत हो गया। मैं इस घटना से “निराश और भयभीत” हूं।हमारे समाज को “ईमानदार और निष्पक्ष आत्मनिरीक्षण” की आवश्यकता है।”
महाराष्ट्र सहित देश के कई अन्य हिस्सों से सामने आ रही बलात्कार की घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए मुर्मू ने कहा कि कोलकाता में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बावजूद अपराधी सक्रिय हैं। हमारे लिए यह जरूरी है कि हम अपनी बेटियों के लिए भयमुक्त वातावरण तैयार करें। यह एक बहुत ही निंदनीय मानसिकता है जो महिलाओं को कमतर इंसान, कम शक्तिशाली, कम सक्षम, कम बुद्धिमान के रूप में, वस्तु के रूप में देखती है। महिलाओं के खिलाफ अपराधों के पीछे कुछ लोगों की ये मानसिकता ही मुख्य कारण है।
राष्ट्रपति ने रक्षाबंधन पर स्कूली बच्चों के एक समूह के साथ अपनी हाल की मुलाकात को याद किया। उस समय दिल्ली में 2012 में हुए निर्भया सामूहिक बलात्कार के मुद्दे पर उन बच्चों ने पूछा था कि क्या उन्हें भरोसा दिया जा सकता है कि भविष्य में निर्भया जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
उन्होंने कहा, “क्या हमने सबक सीखा? जैसे-जैसे सामाजिक विरोध कम होते गए, ये घटनाएं सामाजिक स्मृति के गहरे और दुर्गम कोने में लुप्त हो गईं, जिन्हें केवल तभी याद किया जाता है जब कोई और जघन्य अपराध होता है। अब समय आ गया है कि न केवल इतिहास का सीधे सामना किया जाए, बल्कि अपनी आत्मा में झांककर महिलाओं के खिलाफ अपराधों की विकृति की जांच भी की जाए।
“हमें इस विकृति से व्यापक तरीके से निपटना चाहिए ताकि इसे शुरू में ही रोका जा सके। हम ऐसा तभी कर सकते हैं जब हम पीड़ितों की यादों का सम्मान करें और उन्हें याद करने की सामाजिक संस्कृति विकसित करें, ताकि हमें अतीत में हमारी असफलताओं की याद आए और हम भविष्य में और अधिक सतर्क रहें।” राष्ट्रपति ने कहा कि समाज को ईमानदार, निष्पक्ष आत्मनिरीक्षण की जरूरत है तथा उसे स्वयं से कुछ कठिन प्रश्न पूछने की जरूरत है।
