लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Chunav) का बिगुल बज चुका है और प्रचार दलों कि तरफ से प्रचार शुरू हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने इस बार अब की बार 400 पार का नारा दिया है। हालांकि, बीजेपी के इस ऐलान पर विपक्ष ईवीएम घोटाले को लेकर सवाल उठा रहा है।
विपक्ष खुलेआम कह रहा है कि बीजेपी ईवीएम मशीनों में घोटाला करके ही 400 के पार जाएगी। हालांकि, बीजेपी की ओर से जवाबी सवाल पूछा जा रहा है कि भ्रम सिर्फ वहीं है जहां बीजेपी का उम्मीदवार चुना जाता है, जहां कांग्रेस की सरकार आती है, क्या वहां ईवीएम सही है? इसी बीच आज ईवीएम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर कोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं।
केरल में कासरगोड लोकसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी को 1 वोट अधिक मिलने के मामले में कोर्ट ने जवाब देने का आदेश दिया है। फिलहाल वीवीपैट में 100 फीसदी वोटिंग की गिनती होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। इस बीच याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने केरल की इस घटना का जिक्र किया। उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने आज चुनाव आयोग को अहम निर्देश दिये।
याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर केरल में एक स्थानीय समाचार पत्र की रिपोर्ट पर ध्यान दिया, जिसमें दावा किया गया था कि 4 ईवीएम मशीनों में ईवीएम मशीनों के डेमो के दौरान लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के उम्मीदवार (एलडीएफ) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को वोट बीजेपी से हार गए थे। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि उन्होंने इस संबंध में रिटर्निंग ऑफिसर के पास शिकायत दर्ज कराई थी।
जब प्रशांत भूषण ने इस मामले को कोर्ट के ध्यान में लाया तो मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की बेंच ने चुनाव आयोग को जांच करने का आदेश दिया कि आखिर हुआ क्या था। इसलिए इससे पता चलता है कि कोर्ट भी ईवीएम से छेड़छाड़ या आरोप को लेकर गंभीर है और चुनाव आयोग को भी इस मामले को गंभीरता से लेने का निर्देश दिया गया है।
बता दें कि ईवीएम और वीवीपैट सत्यापन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया. यह चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को ईवीएम मशीनों में वोटों और वीवीपैट मशीनों में सभी रसीदों के सत्यापन के संबंध में एक नोटिस था। क्या ईवीएम और वीवीपैट का सत्यापन संभव है, यह केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से अपेक्षित है। उसी में अब केरल में 1 राय के आधार पर जांच के आदेश दिए गए हैं।
